आत्मा रोकती थी बार-बार इस किले का निर्माण

-किले में हो चुकी है कई फिल्मों की शूटिंग
राजस्थान के किले व महल दुनिया में अपनी अलग पहचान रखते हैं। हर साल लाखों की तादाद में देश-विदेश से पर्यटक राजाओं के शाही ठाठ-बाठ को देखने के लिए आते हैं कि भारतीय राजे-महाराजे किस तरह से एशो-आराम से रहते थे। यह महल व किले हर वर्ग के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। राजस्थान की पिंक सिटी जयपुर में अरावली पर्वत के ऊपर बना ‘नाहरगढ़ किला’ हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचता है। पहले इस किले का नाम सुदर्शनगढ़ था लेकिन बाद में यह किला नाहरगढ़ के नाम से प्रसिद्ध हुआ जिसका अर्थ है शेरों का निवास स्थान। माना जाता है कि इस किले का नाम नाहर सिंह भोमिया के नाम पर पड़ा जिन्होंने इस किले के निर्माण के लिए जगह उपलब्ध करवाई थी। किले के अंदर नाहर सिंह की याद में एक मंदिर भी मौजूद है।

‘नाहरगढ़ किले’ का इतिहास
‘नाहरगढ़ किले’ का निर्माण महाराजा जय सवाई सिंह ने 1734 में करवाया था। बाद में राजा सवाई राम सिंह द्वारा इस किले का विस्तार किया गया। राजा सवाई राम सिंह के बाद राजा सवाई माधो सिंह ने भी किले के अंदर कई भवनों का निर्माण करवाया। इस किले को अंतिम रूप राजा सवाई माधो सिंह द्वारा दिया गया। किले की मुख इमारत को माधवेन्द्र महल के नाम से जाना जाता है। माधवेन्द्र महल के साथ नौ महल जुड़े हुए हैं तथा इन महलों के नाम नौ रानियों के नामों पर रखे गए हैं। इन महलों के नाम इस प्रकार हैं:- सूरज प्रकाश महल, चन्द्र प्रकाश महल, आनन्द प्रकाश महल, जवाहर प्रकाश महल, रत्न प्रकाश महल, लक्ष्मी प्रकाश महल, ललित प्रकाश महल, बसंत प्रकाश महल, खुशाल प्रकाश महल। 1857 के विद्रोह के दौरान युरोपियन लोगों को राजा सवाई राम सिंह ने सुरक्षा के लिए नाहरगढ़ किले भेजा था। एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि इस किले पर कभी कोई आक्रमण नहीं हुआ।

आत्मा करती थी ‘नाहरगढ़ किले’ के निर्माण में बाधाएं उत्पन्न
कहा जाता है कि इस किले के निर्माण के समय कई अजीब घटनाएं घटित हुई। हर दूसरे दिन मज़दूरों को अपना काम बिगड़ा हुआ मिलता था। लोगों का मानना था कि जिस राजा नाहर सिंह भोमिया ने इस किले के निर्माण के लिए जगह दी थी उनकी आत्मा के कारण काम में बाधाएं उत्पन्न हो रही थी। इसके बाद इस किले में नाहर सिंह के नाम पर एक मंदिर बनाया गया। कहते हैं कि नाहर सिंह की आत्मा को स्थान मिलने बाद निर्माण कार्य में कोई बाधा नहीं आई।

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बावड़ी है आकर्षण का केन्द्र
नाहरगढ़ किले में माधवेन्द्र महल के सामने बनी बावड़ी मुख्य आकर्षण का केन्द्र है। असल में यह स्थान उस समय का मुक्ताकाश मंच अर्थात् ओपन एयर थिएटर था। राजाओं के समय में खास मेहमानों के लिए इस स्थान पर मनोरंजन के कार्यक्रम आयोजित होते थे। इस बावड़ी के तीन ओर बनी सीढ़ियां, बावड़ी खूबसूरती को और भी बढ़ा देती हैं।

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किले में हो चुकी है फिल्मों की शूटिंग
नाहरगढ़ किले ने अपनी खूबसूरती व राजसी शान के कारण देश विदेश के पर्यटकों के इलावा फिल्म इंडस्ट्री को भी आकर्षित किया है। बालीवुड स्टार आमिर खान की फिल्म ‘रंग दे बसंती’ की शूटिंग नाहरगढ़ किले में हुई थी। इसके अतिरिक्त अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘शुद्ध देसी रोमांस’ की शूटिंग भी इस किले में हो चुकी है।

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घूमते हैं जंगली जानवर
नाहरगढ़ किले के नज़दीक एक बड़ा जंगल है जिसमें कई प्रकार के जंगली जानवर आज भी घूमते हैं। इस जंगल में राजा-महाराजा शिकार के लिए जाया करते थे। किले में आने वाले पर्यटकों को इस जंगल से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
‘नाहरगढ़ किला’ आज भी उसी राजसी शान से खड़ा है जिस तरह राजाओं के समय में था। जब भी पर्यटक राजस्थान की राजधानी जयपुर में आते हैं तो इस किले में जाना नहीं भूलते। यह प्राचीन किला अपनी खूबसूरती के चलते आज भी देश व दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

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