शनि देव ने बनवास दौरान कुछ इस तरह ली पांडवों की परीक्षा…

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-द्वापर में कलयुग की घटनाओं से करवाया अवगत
परम पिता परमात्मा इस ब्रह्मांड के कण-कण में विद्यमान है। यह भी सच है कि हर अच्छी या बुरी घटना हमें कोई न कोई ज्ञान देने के लिए घटित होती है। चाहे वह कोई परीक्षा ही क्यों न हो। हर परीक्षा हमें पहले से अधिक बेहतर बनाने के लिए आयोजित की जाती है। आज हम आपको द्वापर युग में घटित हुए महाभारत काल के दौरान बनवास में गए पांडवों की न्याय के देवता शनि देव की ओर से ली गई परीक्षा के रहस्य से अवगत करवाते हैं। आखिर कैसे शनि देव ने द्वापर के बाद शुरु होने वाले कलयुग में घटित होने वाली घटनाओं से अवगत करवाने के लिए विशेष परीक्षा का आयोजन किया।

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आखिर पांडवों को क्यों मिला था बनवास
महाभारत के युद्ध से पहले कौरवों की ओर से आयोजित की गई द्युत क्रीडा में पांडवों को हारने के बाद 12 वर्ष का बनवास व एक साल के अज्ञात वास में रहने की सजा सुनाई। एक साल के अज्ञात वास को पूरा करना पांडवों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। सभी पांडव व द्रोपदी एक ऐसी जगह की तलाश कर रहे थे, जहां पर उन्हें कोई भी पहचान न सके। ताकि वह अपना अज्ञातवास आसानी से पूरा कर सकें।

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शनि देव ने बनाया पांडवों के लिए माया महल
पांडवों की ओर से सुरक्षित जगह की तलाश किए जाने के दौरान आसमान से शनि देव गुजर रहे थे। उन्होंने सोचा क्यों न पांडवों की बुद्धिमता की परीक्षा ली जाए। शनि देव ने तुरंत वहां पर एक माया महल का निर्माण कर दिया। माया महल के हर कोने में कई योजन की दूरी रखी गई। शनि देव के माया महल अचानक महाबली भीम की नज़र पड़ी। भीम के मन उस महल में जाने की इच्छा हुई। अपने बड़े भाई युधिष्ठिर से आज्ञा ले कर भीम उस महल के पास पहुंच गए। जैसे ही भीम ने अंदर जाना चाहा। तो दरबान बने शनिदेव ने उसे महल के अंदर जाने से रोक दिया। और कहा कि यदि वह इस महल में जाना चाहते हैं। तो उनकी कुछ शर्तें हैं। पहली शर्त अनुसार महल की चार दिशाओं में से तुम सिर्फ एक ही दिशा में जा सकते हो। दूसरी शर्त अनुसार महल के अंदर जो कुछ भी देखोगे। उसका मतलब बाहर आने पर समझाना होगा। तीसरी शर्त अनुसार यदि तुम सही जानकारी नहीं बता पाए। तो तुम्हें बंदी बना लिया जाएगा।

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चार पांडवों को बनाया बंदी
भीम ने शर्त मंजूर कर महल में प्रवेश कर पूर्व दिशा की तरफ चलना शुरु कर दिया। महल में उसने बहुत ही सुंदर पशु, पक्षी, फलों और फूलों से लदे पेड़ों को देखा। जो उसने आज से पहले कभी नही देखे थे। आगे जाकर भीम ने बहुत ही अजीब नज़ारा देखा। । भीम ने देखा कि वहां तीन कुएं हैं। जिसमे एक बड़ा कुआं औऱ दो छोटे कुएं हैं। जब बड़े कुएं का पानी उछलता, तो दोनों छोटे कुएं भर जाते, लेकिन जब दोनों छोटे कुएं में पानी उछलता हैं। तो बड़े कुएं का पानी आधा ही रह जाता। यह नज़ारा देख भीम महल के बाहर आ गए। दरबान बने शनिदेव ने पूछा कि महल में क्या देखा। भीम ने पशु, पक्षी, फल फूल के बारे तो बता दिया। परंतु कुएं वाली बात के बारे नहीं बता सके। शर्त अनुसार भीम बंदी बना लिया जाता हैं। इसके बाद अर्जुन महल देखने आते हैं। भीतर जाने की शर्त जान वह महल में प्रवेश करते है। अर्जुन पश्चिम दिशा में जाते हैं। अर्जुन देखता हैं कि एक खेत में एक तरफ मक्के की और दूसरी तरफ बाजरे की फसल उग रही हैं। मक्के के पौधों से बाजरे का फल निकल रहा हैं और बाजरे के पौधे से मक्के की उपज हो रही। अर्जुन के कुछ ने बताने पर उसे भी बंदी बना लिया जाता है। थोड़ी देर बाद नकुल भी शर्त समझा महल के अंदर प्रवेश कर उत्तर दिशा की तरफ जाता है। वह देखता हैं कि बहुत सारी सफ़ेद गायें अपनी बछियों के साथ वहां घूम रही हैं। जब गायों को भूख लगती हैं तो वो अपनी बछियों का दूध पी रही थीं। जो कि बेहद अजीब घटना थी। नकुल भी बाहर आ कर कुछ नही बता पाता है। एेसे में उसे भी बंदी बना लिया जाता हैं । इसके बाद महल में जाने की बात करता है। शर्त सुन वह महल में प्रवेश करता है। सहदेव महल में देखता कि एक सोने की बड़ी शिला चांदी के एक सिक्के पर टिकी हुई है। जो की डगमग हिल रही थी, फिर भी गिर नहीं रही थी। सहदेव के बाहर आने पर कुछ भी न बताने पर उसे भी बंदी बना लिया जाता है।

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आखिर युधिष्ठिर ने कैसे अपने भाईयों को करवाया मुक्त
लंबे समय तक चारों भाईयों के वापिस न आने पर चिंतित युधिष्ठिर द्रोपदी के साथ महल में गए। दरबान ने पूछने पर सभी भाइयों के शर्त पूरा न करने पर बंदी बनाने की बात कही। तब युधिष्ठिर ने भीम से पूछा कि बताओ तुमने महल भीतर क्या देखा। भीम ने कुएं के बारे में बताया, तब युधिष्ठिर ने इस घटना के बारे बताया कि कलयुग में एक बाप दो बेटों का पेट तो भर देगा, लेकिन दो बेटे एक बाप का पेट भी नहीं भर पाएंगे । यह जवाब देने पर भीम मुक्त हो जाते हैं। अर्जुन ने फसल के बारे में बताया, तो युधिष्ठिर ने कहा कि कलयुग में वंश परिवर्तन अर्थात ब्राह्मण के घर शुद्र की लड़की और शुद्र के घर ब्राह्मण की लड़की कि शादी होगी। इस जवाब के बाद अर्जुन भी छोड़ दिया गया। नकुल ने गायों वाला सारा किस्सा युधिष्ठिर को बताया। तब युधिष्ठिर ने बताय़ा कि कलयुग में माताएं बेटी के घर रह उन्हीं का अन्न खाएंगी। क्योंकि बेटे माता पिता की सेवा नहीं करेंगे। अंत में सहदेव ने सोने की शिला चांदी पर टिकी होने की जानकारी दी। तब युधिष्ठिर बताया कि कलयुग में पाप धर्म को दबाता रहेगा, फिर धर्म ख़त्म नही होगा । आखिर सभी मुक्त हो गए। तब शनिदेव ने परीक्षा के द्वारा जाना कि युधिष्ठिर सबसे अधिक बुद्धिमान हैं। युधिष्ठिर की ओर से दिए उत्तर आज कलयुग में घटित हो रहे हैं।

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कलयुग में भी पांडवों ने यहां लिया था जन्म
द्वापर के बाद कलयुग में भी पांडवों ने जन्म लिया। धर्मराज युधिष्ठिर ने वत्सराज राजा के पुत्र मलखान के रूप में, अर्जुन ने परिलोक राजा के पुत्र ब्रह्मानंद, भीम ने वनरस राज्य के राजा वीरण के रूप में, नकुल ने कान्यकुब्ज के राजा रत्नभानु के पुत्र लक्षण के रूप में, सहदेव ने भीमसिंह नामक राजा के पुत्र देवसिंह के रूप में जन्म लिया। जबकि धृतराष्ट्र का जन्म अजमेर में पृथ्वीराज के नाम से हुआ और द्रोपदी इनकी पुत्री बेला के रूप में जन्मी थी।

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प्रदीप शाही

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