रूप, रंग, संस्कार, भोजन का कौन करती है श्रृंगार??

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-गुणों की खान है हल्दी को भारतीय संस्कृति में विवाह के पूर्व पूरे शरीर पर लगाने की परंपरा

भारतीय सभ्यता और संस्कृति विश्व विख्यात है। इसकी कारण विश्व भर में सभ्यता व संस्कृति को पास से समझने में हर कोई उत्सुक रहता है। भारत में कई चीजें बेहद विशेष हैं, जो भारतीय रूप, रंग, संस्कार, भोजन का श्रृंगार कर उसे यादगार बना देती है। देश के कोने-कोने में भारतीय भोजन को स्वादिष्ट बनाने में इसका खास तौर से प्रयोग किया जाता है। क्या आप जानते हैं, कि आखिर यह कौन से पदार्थ है। जो इन सभी चीजों को बेहतरीन बनाता है।

भारतीय भोजन में विश्व भर की तुलना में अधिक मसाले प्रयुक्त किए जाते हैं। इनमें प्रमुख तौर से हल्दी ही एक एसा मसाला है।जिसे गुणों की खान कहा जाए, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। सर्दियों के मौसम में हल्दी की गांठ का उपयोग सबसे अधिक लाभदायक किया जाता है। कच्ची हल्दी में हल्दी पाउडर की अपेक्षा ज्यादा गुण होते हैं। हल्दी का उपयोग पाचन तंत्र को सुधारने में, सूजन कम करने में और शरीर के शोधन में किया जाता है। इसमें पाया जाने वाले तत्व करक्यूमिनोइड्स और वोलाटाइल तेल कैंसर रोग से लड़ने के लिए भी जाने जाते हैं।

रूप निखारने में करती है मदद

हल्दी का उपयोग त्वचा को चमकदार और स्वस्थ रखने में भी होता है। इसके एंटीसेप्टिक गुणों के कारण भारतीय संस्कृति में विवाह के पूर्व पूरे शरीर पर हल्दी का उबटन लगाने की रस्म निभाने की परंपरा है। आधा कप दूध की मलाई में दो चम्मच हल्दी मिलाकर प्रयोग करने से त्वचा कांतिमय हो जाती है | अगर चेहरे पर कहीं दाग या धब्बे हैं, तो हल्दी और काले तील समान मात्रा में लेकर पानी डालकर पीस कर पेस्ट बनाकर इस्तेमाल करने से 5 – 7 दिनों में ही चेहरे के सभी दाग– धब्बे और झाइयां तक ख़त्म हो जाती है।

 

डायबिटीज को करता है कंट्रोल 

कच्ची हल्दी में इंसुलिन के स्तर को संतुलित करती है। इसलिए यह मधुमेह रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होती है। इंसुलिन के अलावा यह ग्लूकोज को नियंत्रित करती है, जिससे मधुमेह के दौरान दिए जाने वाले उपचार का असर बढ़ जाता है। परंतु बहुत बढ़े हुए स्तर (हाई डोज) की  दवाइयां चल रही हैं, तो हल्दी के उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है।  हल्‍दी के नियमित सेवन से ग्‍लूकोज का लेवल कम और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा टल जाता है|  कफरोधक होने से मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद है।

शरीर को डिटॉक्स करने में करती है मदद

शरीर में जमा टॉक्सिन को दूर करने के लिए सफाई की जरुरत होती है। बॉडी को डिटॉक्स करने के लिए गर्म पानी में नींबू, हल्दी पाउडर और शहद मिलाकर पीने से शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकलने लगते हैं। कुछ ही दिनों में कई बीमारियां अपने आप ही समाप्त हो जाती है। साथ ही ह्ल्दी का नियमित उपयोग वजन को भी तेजी से कम करता है।

फोड़े, फुंसियों को करता है समाप्त

फोड़े फुंसियों को समाप्त करने में इसका उपयोग बेहद लाभकारी है। एक प्याज को आग में सेक कर, इसकी चार परत लेकर उनपर पीसी हुई हल्दी डालकर जितना गरम सहन हो उतनी गर्म परतें फोड़े पर रख कर ऊपर पीपल का पता रख कर नित्य सुबह– शाम दो बार पट्टी करने से फोड़ा बैठ जाएगा। या फिर फोड़ा पक कर फूट जाएगा।

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कैंसर से लड़ने में करता है मदद

यह पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर के कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने के साथ साथ हल्दी इन्हें खत्म भी कर देती है। यह हानिकारक रेडिएशन के संपर्क में आने से होने वाले ट्यूमर से भी बचाव करती है। अतः  कच्ची हल्दी में कैंसर से लड़ने के गुण होते हैं।

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हृदय रोगों से रखती है सुरक्षित

हल्दी के लगातार इस्तेमाल से कोलेस्ट्रोल सेरम का स्तर शरीर में कम बनता है। कोलेस्ट्रोल सेरम को नियंत्रित रखकर हल्दी शरीर को ह्रदय रोगों से सुरक्षित रखती है।

 

 

इंफेक्शन को रोकती है हल्दी 

शरीर में इम्यून सिस्टम हल्दी के सेवन से मजबूत होता है। कच्ची हल्दी शरीर में बैक्टेरिया की समस्या से बचाव करती है, बुखार होने से रोकती है। इसमें शरीर को फंगल इंफेक्शन से बचाने के गुण होते है।  कच्ची हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी सेप्टिक गुण होते हैं। यह सोराइसिस जैसे त्वचा संबंधि रोगों से बचाव करती हैं।

 

पेट को कीड़ों को मारता है 

पेट में कीड़े होने पर हल्दी का इस्तेमाल फायदेमंद होता है | आधा चम्मच पीसी हुई हल्दी को गरम पानी के साथ दो सप्ताह तक सुबह – शाम दो बार लेने से जल्द ही पेट के कीड़े मर जाते है।  बच्चों के पेट में कीड़े होने पर यह काम मात्रा में प्रयोग किया जा सकता है।

गठिया रोगियों के लिए वरदान

हल्दी में सूजन को रोकने का खास गुण होता है। इसके उपयोग से गठिया रोगियों को अत्यधिक लाभ पहुंचाता है। यह शरीर के प्राकृतिक सेल्स को खत्म करने वाले फ्री रेडिकल्स को खत्म करती है। गठिया रोग में होने वाले जोडों के दर्द में लाभ पहुंचाती है। किसी प्रकार के पुराने दर्द, जोड़दर्द व त्वचा रोगों में यह उपयोगी है। शरीर में कहीं भी दर्द होने पर एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से तुरंत राहत मिलती।

 

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अस्थमा  में लाभदायक 

हल्दी सांस रोग जैसे अस्थमा में राहत पहुंचाती है। 60 ग्राम पीसी हुई हल्दी चार चम्मच देशी गाय के घी में  सेक कर कांच की शीशी में भर कर रख लेनी चाहिए। रोज़ आधा चम्मच यह हल्दी गर्म दूध के साथ दिन में तीन बार नियमित प्रयोग करने से जल्द ही दमे के रोग में लाभ प्राप्त होता है। रक्तसंचार भी बेहतर होता है।

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इम्यून सिस्टम को करता है मजबूत

कच्ची हल्दी से बनी चाय अत्याधिक लाभकारी सिद्ध हुई है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। हल्दी लीवर को भी स्वस्थ रखती है। हल्दी के उपयोग से लीवर सुचारु रुप से काम करता रहता है।

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जुकाम और खांसी में हितकारी

जुकाम में पांच काली मिर्च पीसकर आधा चम्मच पीसी हुई हल्दी में मिलाकर गरम पानी में घोल कर पीने से  जुकाम ठीक हो जाता है और खांसी की समस्या भी नहीं रहती है| इस प्रयोग के बाद 1 घंटे तक पानी और कोई ठंडा पेय नहीं पीना चाहिए। खांसी होने पर एक गिलास गरम दूध में एक चम्मच हल्दी और मिश्री मिलाकर सेवन करने से खांसी की समस्या जड़ से ख़तम हो जाती है।

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स्टेमिना बढ़ने में लाभदायक

एक गांठ कच्ची हल्दी की लेकर पीसकर इसका रस निकालकर समान मात्रा में शहद मिलकर  चाटने से स्टेमिना बढ़ता है। एक अन्य उपाय में 250 ग्राम पीसी हुई हल्दी को गाय के घी में सेक कर चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। रात को सोते समय एक चम्मच चूर्ण गरम दूध के साथ फक्की लेने से जल्द ही शरीर में मर्दाना ताकत और स्फूर्ति लौट आती है।

चोट के घाव को शीघ्र भरता है

चोट के कारण शरीर पर कहीं घाव हो गया हो, तो हल्दी की छोटी  गांठ को पानी में  पीसकर घाव पर लेप करने से घाव जल्दी भरता है। दर्द भी कम होता है।

 

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विशेष तौर से रखें ध्यान…

यद्यपि कच्ची हल्दी, अदरक की तरह दिखाई देती है। इसे जूस में डालकर, दूध में उबालकर, चावल के व्यंजनों में डालकर, अचार के तौर पर, चटनी बनाकर और सूप में भी उपयोग किया जाता है। फिर भी   कुछ लोगों पर इसके सेवन का विपरीत प्रभाव पड़ सकता हैं। जिन लोगों को हल्दी से एलर्जी है, उन्हें पेट में दर्द या डायरिया जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ता हैं। गर्भवती महिलाओं को कच्ची हल्दी के उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह ले लेनी चाहिए। क्योंकि इससे कभी कभी  खून का थक्का जमना भी कम हो जाता है जिससे रक्त का बहाव बढ़ जाता है। अत: अगर किसी की सर्जरी होने वाली हो, तो उन्हें कच्ची हल्दी का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।

वंदना

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