युधिष्ठिर ने महिलाओं को, द्रोपदी ने कुत्तों को क्यों दिया श्राप…

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-आज भी कलयुग में फलित हो रहे हैं यह श्राप
यह पूर्णतया सच है कि जब भी कोई वरादन या श्राप दिया जाता है, तो अवश्य फलित होते हैं। आज आपको महाभारत काल में दो एेसे श्राप दिए जाने के बारे बताते हैं। जो आज कलयुग में भी फलित हो रहे हैं। यह श्राप धर्मराज के नाम से जाने जाते युधिष्ठर और द्रोपदी ने दिए थे। क्या थे यह श्राप। आखिर इन श्राप को देने के पीछे क्या मकसद था।

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युधिष्ठर ने महिलाओं को क्यों दिया श्राप
महाभारत के युद्ध के दौरान दानवीर कर्ण की मौत की जानकारी मिलने पर माता कुंती मृत पड़े कर्ण के सिर को अपनी गोद में रख कर विलाप करने लगी। कौरवों का साथ देने वाले कर्ण के साथ इस तरह की हमदर्दी देखकर सभी पांडव आशचर्यचकित हो जाते हैं। आखिर माता एक शत्रु के लिए क्यों आंसू बहा रही हैं। जब युधिष्ठर ने अपनी माता इस जिज्ञासा को शांत करने के लिए कहा। तो उन्होंने बताया कि अंगराज कर्ण उनके सबसे बड़े बेटे हैं। जो महाराज पांडू की शादी से पहले जन्मे थे। यह जानकर युधिष्ठर को काफी दुख हुआ। उन्होंने इस युद्ध के लिए अपनी माता को जिम्मेदार ठहराते हुए समूची नारी जाति को ही श्राप देते कहा कि वह आज के बाद अपना कोई भी भेद अपने पास छिपा कर नहीं रख पाएंगी। जो आज कलयुग में भी फलित हो रहा है।

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द्रोपदी ने कुत्तों को क्यों दिया श्राप
महाभारत में माता कुंती की वजह से द्रोपदी को को पांचों भाईयों की पत्नी बन कर रहना पड़ा। जबकि द्रोपदी का स्वंयवर अर्जुन से हुआ था। असल जानकारी मिलने पर माता कुंती को भी अपने कहे वचनों पर बेहद दुख हुआ। परंतु सभी पुत्रों औऱ द्रोपदी ने माता के वचनों की लाज रख ली। पांचों पुत्रों से शादी करने के बाद तय हुआ कि जब कोई भी द्रोपदी के शयन कक्ष में जाएगा, तो वह द्वार पर अपना चरण पादुकाएं बाहर रख देगा। ताकि अन्य कोई उस कक्ष में दाखिल न हो सके। एक बार युधिष्ठर द्रोपदी के शयन कक्ष में मौजूद थे। उनकी चरण पादुकाएं बाहर पड़ी थी। परंतु एक कुत्ता उनकी पादुकाओं को उठा कर ले गया। और उसे नोंचने लगा। द्वार के बाहर कोई पादुकाएं न होने पर भीम कक्ष में दाखिल हो गया। वहां पर भाई को द्रोपदी संग अतरंग क्षण में देखा। वह इस गुस्से में बाहर निकला। तो कुछ दूरी पर भीम ने देखा की एक कुत्ता युधिष्ठर की पादुकाओं को नोंच रहा है। द्रोपदी को जब समूची जानकारी मिली को उन्होंने गुस्से में आकर कुत्तों की समूची प्रजाति को श्राप दिया कि तुम्हारे कारण मुझे आज शर्म महसूस हो रही है। परंतु आज से हमेशा तुम्हें समूची दुनिया सेक्स करते देखेगी। यही तुम्हारी सजा है। यह श्राप आज भी फलित है।

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प्रदीप शाही

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