नहीं बनेगी ‘पथरी’ खाएं यह दाल

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बार-बार पथरी बनने की समस्या से परेशान हैं तो खाएं यह दाल

निरोग शरीर पाने के लिए हमारे खान-पान में अच्छी व सेहतमंद चीज़ों का शामिल होना जरूरी है। कहावत है कि जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन। भारतीय संस्कृति में अन्न को ‘अन्नपूर्णा’ मतलब ईश्वर के रूप में सम्मान देने का भी यही कारण है।वैदिक ऋषियों के अनुसार हमारे स्वस्थ शरीर और मस्तिष्क के लिए भोजन के प्रकार तथा भोजन करने के ढंग का विशेष महत्व रहता है। आयुर्वेद में दिए गए उपायों व खाने-पीने की वस्तुओं को अगर अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया जाए तो व्यक्ति निरोग रह सकता है। आज की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी ने हमारे खान-पान को प्रभावित किया है जिससे कब्ज़, एसिडिटी, शूगर व पथरी जैसे रोग आम हो चुके हैं। किन्तु हमारी रसोई में अनेक ऐसे नुस्खे उपलब्ध हैं जिनका प्रयोग कर इन रोगों से मुक्ति मिल सकती है। आज हम आपको ‘कुलथी की दाल’ के कुछ ऐसे फायदों के बारे में बताएंगे जिन्हें जानकर आप दंग रह जाएंगे।

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पथरी का इलाज

अक्सर गलत खान-पान या जरूरत से कम पानी पीने के कारण गुर्दों में पथरी की समस्या हो जाती है।पथरी से व्यक्ति को तेज़ दर्द के साथ-साथ उल्टी की समस्या, पेशाब का रुक कर आना, खून आना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं। आयुर्वेद के अनुसार कुलथी की दाल में विटामिन ‘ए’ पाया जाता है जो पथरी को रोकने में मदद करता है। अतः पथरी की समस्या में कुलथी की दाल का सेवन लाभदायक है।

कैसे करती है कुलथी की दाल अपना काम

कुलथी की दाल बड़ी पत्थरी को तोड़ देती है जिससे पथरी आसानी से मूत्र द्वार से घुलकर बाहर निकल जाती है।कुलथी की दाल में मूत्र की मात्रा को बढ़ाने का गुण होता है जिसके सेवन से पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है। और पथरी के कणों पर दबाव पड़ता है ओर वह नीचे की ओर खिसकते हुए बाहर आ जाती है।

कैसे करें दाल का प्रयोग

कुलथी की दाल को 200 ग्राम मात्रा में साफ कर लें और रात को दो से ढाई लीटर पानी में भिगो दें। सुबह इस दाल को हल्की आंच पर अच्छे से पकाएं और जब पानी ठीक मात्रा में रह जाए तो छौंक लगा दें। इसमें आप सवाद के लिए काली मिर्च, जीरा, सेंधा नमक व हल्दी डाल सकते हैं।

कैसे करें दाल का पानी तैयार?

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200 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुलथी की दाल डाल दें और रात भर ढक कर रख दें । सुबह इस पानी को खाली पेट पी लें। जिन्हें पथरी की शिकायत बार – बार हो जाती है उन्हें दाल के पानी का सेवन कभी-कभी करते रहना चाहिए। इसके सेवन से भविष्य में पथरी बनने की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

इन बीमारियों में भी असरदायक है कुलथी की दाल

शूगर यानि मधुमेह का रामबाण इलाज

शूगर के मरीजों के लिए यह दाल रामबाण इलाज है।कुलथी की दाल से खून में ग्लूकोज़ का लेवल सही रहता है। इस लिए शूगर के मरीजों को अपने खाने में कुलथी की दाल को शामिल करना लाभदायक रहता है।

सर्दी-जुकाम में लाभदायक

कुलथी की दाल की तासीर गर्म होती है इसलिए सर्दी-जुकाम के लिए फायदेमंद है। दाल का सूप बनाकर पीने से सर्दी-जुकाम से राहत मिलती है। जिससे शरीर को गर्मी मिलती है और नाक खुलता है। वहीं इस दाल के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।

वजन होता है कम

सुबह खाली पेट नाश्ते के रूप में कुलथी की दाल उबालकर खाने से वजन कम करने में मदद मिलती है।इसमें प्रोटीन काफी मात्रा में होता है। आयुर्वेद में कुलथी की दाल और मक्खन से फैटी क्षेत्र में मालिश करने से फायदा होता है।

महिलाओं के लिए है फायदेमंद

कुलथी की दाल महिलाओं की मासिक धर्म से संबंधित समस्याओं को दूर करने में सहायक सिद्ध होती है। इस दाल में लोह तत्व मौजूद होने के कारण यह खून की कमी को दूर करती है। आयुर्वेद के अनुसार महिलाओं को आयुर्वेद के किसी माहिर की देख रेख में रोज़ाना एक चमच कुलथी की दाल के पाउडर का सेवन करना चाहिए।

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आंतों के लिए है लाभदायक

कुलथी की दाल आंतों की समस्याओं को कम करके पाचन तंत्र को मज़बूत करती है। इसमें मौजूद पालीफेनाल पेट के कीड़ों को खत्म करता है। पेट फूलने की समस्या के भी छुटकारा मिलता है। एक अध्ययन में सामने आया है कि कुलथी की दाल आंतों के अल्सर को ठीक करने में सहायक सिद्ध होती है।

बवासीर के इलाज में भी है असरदायक

बवासीर की बीमारी में आयुर्वेदिक माहिर कुलथी की दाल के सेवन की सलाह देते हैं। रात के समय भिगो कर रखी दाल के पानी को पीना व इसके बीजों को सलाद के रूप में खाना बवासीर में लाभदायक होता है।

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अस्थमा में मिलती है राहत

कुलथी की दाल में प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेटस के इलावा एंटीआक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। साथ ही इसमें बायोएक्टिव पदार्थ भी होते है जो सर्दी, गले की बीमारियों, अस्थमा जैसी बीमारियों को खत्म करने में मददगार सिद्ध होते हैं।

कुलथी की दाल के नुकसान

कुलथी की दाल की तासीर गर्म होती है। इस लिए इसका प्रयोग कम मात्रा में करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। तपेदिक व उच्च रक्ताचाप के मरीजों को कुलथी की दाल के सेवन से बचना चाहिए। जो लोग एनीमिया की दवाई ले रहे हैं उन्हें कुलथी की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। अतः किसी भी रोग या समस्या में कुलथी की दाल का सेवन करने से पहले डाक्टर या आयुर्वेदिक माहिर की सलाह जरूर ले लें।

धर्मेन्द्र संधू

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