चट्टान काटकर बनाया गया उत्तर भारत का पहला मंदिर

हिमाचल में भी हैं एलोरा जैसी गुफाएं-

हिमाचल प्रदेश को देव भूमि के नाम से जाना जाता है। हिमाचल में ज्वाला देवी, चिंतपूर्णी माता, नयना देवी, चामुण्डा देवी इत्यादि शक्तिपीठों के इलावा कई प्रसिद्ध व ऐतिहासिक मंदिर हैं जो सदियों पुराने इतिहास व कथाओं को समेटे हुए हैं। हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक व श्रद्धालु हिमाचल घूमने व मंदिरों के दर्शन करने आते हैं। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जिसका निर्माण एक चट्टान को काटकर व तराशकर किया गया है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के दक्षिण में स्थित है ऐतिहासिक ‘मसरूर मंदिर’।

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मसरूर मंदिर का इतिहास

इस मंदिर के निर्माण संबंधी माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण आठवीं शताब्दी में एक चट्टान पर नक़्काशी करके किया गया था। बलुआ पत्थर को काटकर बनाए गए मसरूर मंदिर को 1905 में आए भूकंप के कारण काफी नुकसान पहुंचा था। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव इस मंदिर में लम्बे समय तक रहे। यहां पर 15 मंदिरों का समूह है। मंदिर की छत पर भगवान शिव की मूर्ति स्थापित की गई है जो दर्शाती है कि यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर के मुख्य द्वार को ठाकुरद्वारा कहा जाता है तथा इस मंदिर में भगवान राम ,सीता व लक्ष्मण की मूर्तियां स्थापित हैं। सर्वप्रथम इस मंदिर की खोज 1913 में अंग्रेज पर्यटक एच.एल. स्टलबर्थ द्वारा की गई थी।

 

मंदिर की बेजोड़ नक़्काशी

आठवीं शताब्दी का यह मंदिर एक अखंड चट्टान को तराशकर इंडो-आर्यन शैली में बनाया गया है। चट्टान को काटकर बनाए गए इस मंदिर में बेहद खूबसूरत नक्काशी की गई है। माना जाता है कि इस प्रकार के चट्टानी पत्थरों पर नक्काशी करना बेहद मुश्किल काम है। इस मंदिर की नक्काशी बाहर से आए हुए कारीगरों द्वारा की गई थी लेकिन आज तक यह प्रमाणित नहीं हो सका कि यह कारीगर कौन थे और कहां से आए थे। इस मंदिर के निर्माण में सीमेंट इत्यादि का प्रयोग नहीं किया है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञात वास के दौरान द्रोपदी के लिए इस मंदिर में एक झील भी बनवाई थी। जिसमें मंदिर का प्रतिबिम्ब दिखाई देता है जो मसरूर मंदिर की खूबसूरती को चार चांद लगाता है। इस प्रकार की नक्काशी खास तौर पर दक्षिण भारत के मंदिरों में देखने को मिलती है लेकिन यह मंदिर हिमाचल का अनूठा मंदिर है। मंदिर की संरचना गुफाओं के अंदर है इस लिए इस मंदिर को अजंता-एलोरा आफ हिमाचल भी कहा जाता है।

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राष्ट्रीय धरोहर के रूप में किया गया है चयनित

राक कट टेंपल मसरूर उत्तर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जिसे एक ही चट्टान से काटकर बनाया गया है। कांगड़ा के इस प्रसिद्ध मसरूर मंदिर को आदर्श स्मारक के रूप में विकसित करने के लिए चयनित किया गया है। आदर्श स्मारक योजना के तहत देश भर की 25 राष्ट्रीय इमारतों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने व संवारने के लिए चयनित किया गया है।

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कैसे पहुंचें

कांगड़ा के दक्षिण में स्थित यह मंदिर कांगड़ा के बस स्टैंड से 37 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कांगड़ा बस स्टैंड से बस या टैक्सी द्वारा इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। मसरूर मंदिर पहुंचने के लिए नज़दीकी एयरपोर्ट गगल एयरपोर्ट है जिसकी दूरी मंदिर से महज 31 किलोमीटर है। सरकार द्वारा इस मंदिर को राष्ट्रीय संपत्ति के तहत संरक्षित किया गया है।

धर्मेन्द्र संधू

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