त्वचा रहे जवां, खूबसूरती, उर्जा बढ़ाए, तनाव होता है दूर….

-पितरों के तर्पण में होता है तिलों का प्रयोग
-आयुर्वेद ने माना तिल का सेवन है बेहद गुणकारी
प्रकृति की ओर से प्रदान किए गए अनमोल खजाने में तिल एक एेसा पौधा है। जिसका प्रयोग भारत में हजारों सालों से किया जा रहा है। तिल व तिल के तेल को आयुर्वेद ने भी बेहद गुणकारी माना है। पितरों के तर्पण में किए जाने वाले प्रयोग के अलावा तिल त्वचा को जवां, खूबसूरती व उर्जा को बढाने, तनाव को दूर रखने में खास तौर से प्रुयक्त किया जाता है।

कहां कहां पैदा होता है तिल
तिल Sesamum indicum एक पुष्प पौधा के रुप में पहचान रखता है। भारत में इसकी खेती करीब पांच हजार साल पहले की मानी गई है। तिल के कई जंगली रिश्तेदार अफ्रीका में भी पाए जाते हैं। यहां पर आठ-नौ जाति के जंगली तिल पाए जाते हैं। तिल के बीज का उपयोग हजारों वर्षों से किया जाता रहा है। विश्व के सभी गर्म देशों में इसकी खेती की जाती है। आयुर्वेद ने भी इसके गुणों को स्वीकार किया है। तिल के बीज से खाद्य तेल निकाला जाता है। तिल को विश्व का सबसे पहला तिलहन भी माना गया है। तिल 50 से 100 सेंटीमीटर तक बढता है। तिल के फूल तीन से पांच सेंटीमीटर सफेद और बैंगनी रंग के होते हैं। तिल के बीज अधिकतर सफेद रंग के होते हैं। जबकि यह रंग में काले, पीले, नीले या बैंगनी रंग के भी हो सकते हैं।

कितने प्रकार के होते हैं तिल
भारत में तिल दो प्रकार के सफेद और काले रंग के होते है। वहीं तिल की दो फसलें कुवारी और चैती मानी गई है। । कुवारी फसल की बुआई बरसात में ज्वार, बाजरे, धान के साथ ही की जाती है। जबकि चैती फसल की यदि कार्तिक में बुआई की जाए, तो यह फसल माघ तक तैयार हो जाती है।

 

तिल, तिल का तेल है बेहद गुणकारी
तिल शब्द संस्कृत में प्राचीन है। केवल तिल के बीज ही एेसे हैं, जिससे तेल निकाला जाता है। तिल से निकलने के कारण ही इसका नाम ही तैल पड़ गया। अथर्ववेद में तिल और धान द्वारा तर्पण का उल्लेख है। आजकल भी पितरों के तर्पण में तिल का प्रयोग किया जाता है। तिल व तिल के तेल में एेसे कई गुण हैं। जिन्हें सही ढंग से यदि पहचान लिया जाए, तो हमारी कई समस्याओं का समाधान हो सकता है। भारतीय खानपान में तिल का बहुत अघिक महत्‍व है। तिल में प्रोटीन, कैल्शियम, बी-कांप्लेक्‍स और कार्बोहाइट्रेड तत्‍व सबसे अधिक पाए जाते हैं।

तनाव करे दूर, मानसिक दुर्बलता हटाए
तिल के सेवन से जहां तनाव दूर होता है, वहीं मानसिक दुर्बलता भी समाप्त होती है। प्राचीन समय से ही खूबसूरती बनाये रखने के लिए तिलों का प्रयोग किया जाता रहा है।

त्वचा की खूबसूरती बढ़ाने को होता है प्रयोग
सर्दियों के मौसम में तिल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। इससे शरीर सक्रिय रहता है। प्राचीन काल से ही खूबसूरती बनाये रखने के लिए तिलों का प्रयोग किया जाता रहा है। तिल के तेल की मालिश से त्वचा का रुखापन समाप्त हो जाता है। क्योंकि यह तेल अन्य तेलों की तुलना में त्वचा में बहुत जल्दी समा जाता है। नियमित मालिश करने से ब्‍लड की सर्कुलेशन की बेहतर बनी रहती है। तिलों में एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होने के काऱण इसके प्रयोग से त्वचा जवां बनी रहती है। इसमें प्राकृतिक सनस्क्रीन के सभी गुण मौजूद हैं।

घावों को जल्द भरता है एंटी-बैक्टीरियल तिल
तिल में एंटी-बैक्टीरियल गुण होने के कारण यह किसी भी तरह के घाव को शीघ्र भर देता है। साथ शरीर में किसी भी तरह की आई सूजन को आराम देता है। एक्जिमा जैसा रोग होने पर उसे ठीक करने में मदद करता है।

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बच्‍चों के मूत्र निकलने की समस्‍या का करता है समाधान
आमतौर से बच्‍चे रात के समय सोते समय मूत्र कर देते हैं। तो इस समस्‍या का समाधान तिल के सेवन से किया जा सकता है। भुने काले तिलों को गुड़ के साथ मिलाकर लड्डू बना कर बच्चे को खिलाने से लाभ मिलता है।

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तिल में है प्राकृतिक कंडीशनर
तिल के तेल में बालों के लिए प्राकृतिक कंडीशनर है। इससे बालों में मालिश करने से बालों में स्वाभाविक चमक और बालों में मजबूती आती हैं। तिलों का सही ढंग से इस्तेमाल करने से बाल निर्धारित समय से पहले सफेद नहीं होते हैं। क्योंकि तिल यूवी किरणों के बुरे प्रभाव से भी बालों की रक्षा करता है।

तिल करे मानसिक दुर्बलता को दूर
तिल में मौजूद प्रोटीन, कैल्शियम और बी-कांप्लेक्स के गुण के कारण इसके सेवन से मानसिक दुर्बलता व तनाव दूर होता है। रोजाना पचास ग्राम तिल खाने से कैल्शियम की कमी पूरी होती है।

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मासिक धर्म की अनियमिताओं को करे दूर
तिल की गर्म तासीर महिलाओं के मासिक धर्म चक्र के दौरान होने वाले दर्द या अन्‍य समस्‍या का समाधान करती है। इसके सेवन से महिलाओं का गर्भाशय मजबूत और बीमारी रहित रहता है।

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तिल दिलाए कब्‍ज और बवासीर समस्‍या से मुक्ति
तिल के बीज कब्‍ज और बवासीर इन दोनों रोगों से मुक्ति दिलाते हैं। 50 ग्राम तिलों को भून कर पीस कर चीनी में मिला कर खाने से कब्ज दूर हो जाती है। जबकि बवासीर होने पर प्रतिदिन दो चम्‍मच काले तिल को चबाकर खाने के बाद ठंडा पानी पीने से पुरानी बवासीर भी ठीक हो जाती है।

प्रदीप शाही

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