अंतरिक्ष में मैसेज भेजने की समस्या का हल निकाला इस भारतीय भाषा ने…

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-अंग्रेजों ने अनिवार्य विषय बनाया तो जर्मनी में बढ़ी मांग

-र्फोब्स ने माना कंप्यूटर साफट्वेयर के लिए यही सबसे उपयुक्त

नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब वो अंतरिक्ष ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे तो उनके वाक्य कई बार उल्ट हो जाते थे। इस वजह से मैसेज का अर्थ ही बदल जाता था। उन्होंने कई भाषाओं का प्रयोग किया लेकिन हर बार यही समस्या आई। आखिर में उन्होंने एक ऐसी भाषा की तलाश शुरू की जिसे आगे या पीछे से पढ़ा जाए तो वाक्य का अर्थ ना बदले इतना ही नहीं जब नासा के वैज्ञानिको का शोध पूरा हुआ तो सामने आया कि आर्यो की भाषा या विश्व की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत ही है जिसे ना केवल अंतिम अक्षर से उल्ट दिशा में पढ़ा जा सकता है। बल्कि किसी वाक्य के बीच में से भी शब्दों को उल्ट पुल्ट कर पढ़ा जाए तो भी वाक्य का मूल अर्थ नहीं बदलेगा। इसके बाद नासा की ओर से अंतरिक्ष में मैसेज संस्कृृत में भेजा गया और कामयाब रहा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे हो जाने पर भी अपना अर्थ नही बदलते हैं।

उदाहरण के तौर पर देखें तो

अहम् विद्यालयं गच्छामि।

विद्यालयं गच्छामि अहम्।

गच्छामि अहम् विद्यालयं।

उक्त तीनो के अर्थ में कोई अंतर नहीं है।

संस्कृत के बारे में कई तथ्य हैं जिन्हें जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा। अलबत्ता इस बात का अफसोस भी होगा कि हमने संस्कृत का ना केवल निरादर किया बल्कि अंगेजी के प्रेम में डूबकर इसे सौतेली भाषा भी रहने नहीं दिया।

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दिलचस्प तथ्य यह भी है कि अंग्रेजोें ने माना कि संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता है और याद करने की शक्ति बढ़ती है, संभव है कि यही कारण रहा होगा कि अमेरिकन के बाद अंग्रेजों, जर्मन, आयरिश लोगों की बात करें तो सामने आया कि लंदन व आयरलैंड के स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य भाषा बना दिया गया हैै। जबकि जर्मनी के 14 विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है। इस समय के विश्व के 17 देशों में कम से कम एक युनिवर्सिटी में संस्कृत को तकनीकि शिक्षा के रूप में संस्कृत पढ़ाई जा रही है।

यह भी सही है कि संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी माना जाता है, लेकिन वर्तमान में केवल भारत के एकमात्र राज्य उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा है। जबकि अरब से आने वाले खलीफाओं की दखलंदाजी से पहले संस्कृत समस्त भारतवर्ष की राष्ट्रीय भाषा थी, जो अफगानिस्तान से मयम्मार व भूटान से श्री लंका तक बसा था।

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नासा के मुताबिक, संस्कृत धरती पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है। संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से ज्यादा शब्द है। वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है।

संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक अद्भुत खजाना है। जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से ज्यादा शब्द है। नासा के पास संस्कृत में ताड़पत्रों पर लिखी 60,000 पांडुलिपियां है जिन पर नासा रिसर्च कर रहा है। फोबर्स मैगजीन ने जुलाई, 1987 में संस्कृत को कंप्यूटर साफट्वेयर के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था। क्यांेकि संस्कृत मेें किसी और भाषा के मुकाबले सबसे कम शब्दों में वाक्य पूरा हो जाता है।

यह दुनिया की अकेली ऐसी भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी मांसपेशियों का इस्तेमाल होता है। अमेरिकन हिंदु युनिवर्सिटी के अनुसार संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी, मधुमेह, कोलेस्ट्राॅल आदि रोग से मुक्त हो

जाएगा। संस्कृत में बात करने से मानव शरीर की तंत्रिका तंत्र सदा सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश के साथ सक्रिय हो जाता है। यानि सही तरीके से चार्ज रहता है।

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संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार है यह एकाग्रता को बढ़ाती है। कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि कंप्यूटर द्वारा गणित के सवालों को हल करने वाली विधि यानि एलोगोरिदम संस्कृत में बने है ना कि अंग्रेजी में। नासा के वैज्ञानिको द्वारा बनाए जा रहे 6 जी और 7 जी जेनरेशन सुपर कंप्यूटर संस्कृत भाषा पर आधारित होंगे जो 2034 तक बनकर तैयार हो जाएंगे।

यहां यह भी बताते चलें कि सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था जो 1970 में शुरू हुआ था। आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध है।

संस्कृत के बारे में ये तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा!

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