भगवान विश्वकर्मा जी का पावन पर्व आज, कैसे करें पूजन

    हिन्दू धर्म में विश्वकर्मा को निर्माण एवं सृजन का देवता माना जाता है। चार युगों में विश्वकर्मा ने कई नगर और भवनों का निर्माण किया। कालक्रम में देखें तो सबसे पहले सत्ययुग में उन्होंने स्वर्गलोक का निर्माण किया, त्रेता युग में लंका का, द्वापर में द्वारका का और कलियुग के आरम्भ के ५० वर्ष पूर्व हस्तिनापुर और इन्द्रप्रस्थ का निर्माण किया। विश्वकर्मा ने ही जगन्नाथ पुरी के जगन्नाथ मन्दिर में स्थित विशाल मूर्तियों (कृष्ण, सुभद्रा और बलराम) का निर्माण किया।

    माना जाता है कि भगवान विश्‍वकर्मा ने ही देवताओं के भवनों और महलों का निर्माण किया। पुराणों के अनुसार विश्वकर्मा भगवान को देव बढ़ई भी कह कर पुकारा जाता है। इस दिन जो भी पूजा करता है उसका व्‍यापार अच्‍छा चलता है।
    हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को पूरी दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर होजे का दर्ज़ा प्राप्त हैं। पुराणों के अनुसार विश्वकर्मा भगवान को देव बढ़ई भी कह कर पुकारा जाता है। इस दिन जो भी पूजा करता है उसका व्‍यापार अच्‍छा चलता है।
    आज के दिन लोग फैक्‍ट्रियों, कार्यालयों या उद्योगों में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनों की पूजा करते हैं। अगर आप किसी मशीन की बजाय कंप्यूटर या लैपटॉप कर काम करते हैं तो आपको उसकी भी पूजा आज के दिन जरूर करनी चाहिए। इस दिन भगवान विश्वकर्मा और मशीनों की पूजा करने से काम में और तरक्की मिलती है।

    पूजा की विधि :
    पूजा करने के लिए सबसे पहले स्नान करें और उसके बाद अपनी मशीन को अच्छे से साफ़ कर लें। उसके बाद घर के मंदिर में जाकर विष्णु भगवान और विश्वकर्मा भगवान की पूजा करें और कमंडल में कुछ फूल रखकर भगवान और मशीन पर चढ़ाएं।
    घर के आंगन में आठ फूलों वाला कमल बनाएं और उसमें सात तरह के अनाज रखें। इस अनाज पर मिट्टी के बर्तन में रखें पानी से छिडकाव करें। अब सात प्रकार की मिट्टी, अनाज, फूलों और दक्षिणा को एक साफ़ कपड़े में लपेटकर रख लें और अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें।

    भगवान विश्वकर्मा जी की आरती
    ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
    सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥

    आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
    शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥

    ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
    ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥

    रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
    संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥

    जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
    सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥

    एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
    द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥

    ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
    मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥

    श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
    कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥

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