प्रभु श्री राम के वंशज आज भी हैं जिंदा….

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-भवानी सिंह थे कुश के 309वें वंशज

भगवान श्री हरि विष्णू जी, प्रभु श्री राम के रुप में छठे अवतार के रुप में धरती पर अवतरित हुए। भगवान श्री राम ने महाराजा दशरथ व माता कौशल्या के परिवार में भगवान श्री राम ने ज्येष्ठ पुत्र के रुप में जन्म लिया। उनके अलावा भरत, लक्ष्मण व शत्रुघन ने उनके अनुज के रुप में जन्म लिया। मृत्यु लोक में जन्म लेने के बाद भगवान के निर्धारित किए विधान को मानते हुए सरयू नदी में जल समाधि लेने के बाद बैकुंठ धाम को प्रस्थान किया। क्या आप जानते हैं कि सदियां बीत जाने के बाद आज भी भगवान श्री राम व उनके भाईयों के वंशज इस धरती पर आज भी हमारे मध्य मौजूद हैं। यदि नहीं तो हम आपको बताते हैं कि उनके वंशज कहां मौजूद हैं।

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भगवान राम व अन्य भाईयों के परिवार की जानकारी
भगवान श्री राम व माता सीता के परिवार में जुडवां बेटे लव व कुश का जन्म हुआ था। जबकि भरत के दो पुत्र तार्क्ष और पुष्कर, लक्ष्मण के पुत्र चित्रांगद और चंद्र केतु, शत्रुघ्न के पुत्र सुबाहु और शूरसेन थे।

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श्री राम ने बैकुंठ धाम गमन से पहले एेसे सौंपा था राज्य
भगवान राम ने बैकुंठ धाम से पहले भरत का राज्याभिषेक करना चाहा। परंतु उनके अनुज भरत ने इसे अस्वीकार कर दिया। एेसे में श्री राम ने दक्षिण कौशल प्रदेश मौजूदा छत्तीसगढ़ , कुशस्थली और आयोध्या का राजा कुश और उत्तर कौशल मौजूदा पंजाब का राजा लव को घोषित किया। लव ने लाहौर को और कुश ने कुशावती को आज के बिलासपुर जिले को अपनी राजधानी बनाया। एतिहासिक तथ्यों के अनुसार लव ने लवपुरी नगर की स्थापना की थी। जो वर्तमान में पाकिस्तान स्थित शहर लाहौर है। यहां के एक किले में लव का एक मंदिर भी बना हुआ है। लवपुरी को बाद में लौहपुरी कहा जाने लगा। मौजूदा तक्षशिला में तब भरत पुत्र तक्ष और पुष्करावती (पेशावर) में पुष्कर सत्तारुढ हुए। हिमाचल में लक्ष्मण पुत्रों अंगद का अंगदपुर और चंद्रकेतु का चंद्रावती में शासन और मथुरा में शत्रुघ्‍न के पुत्र सुबाहु तथा दूसरे पुत्र शत्रुघाती का भेलसा (विदिशा) में शासन था। गौर हो मथुरा का नाम पहले शूरसेन था।

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लव से राघव राजपूतों का हुआ जन्म
राजा लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ माना गया है। जिनमें बड़गुजर, जयास और सिकरवारों का वंश चला। वहीं कुश की शाखा सिसोदिया राजपूत वंश की है। जिनमें बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) वंश के राजा हुए।

 

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कुश के वंशज कौन हैं?
राम के दोनों पुत्रों में कुश का वंश आगे बढ़ा। कुश से अतिथि, निषधन, नभ, पुण्डरीक, क्षेमन्धवा, देवानीक, अहीनक, रुरु, पारियात्र, दल, छल, उक्थ, वज्रनाभ, गण, व्युषिताश्व, विश्वसह, हिरण्यनाभ, पुष्य, ध्रुवसंधि, सुदर्शन, अग्रिवर्ण, पद्मवर्ण, शीघ्र, मरु, प्रयुश्रुत, उदावसु, नंदिवर्धन, सकेतु, देवरात, बृहदुक्थ, महावीर्य, सुधृति, धृष्टकेतु, हर्यव, मरु, प्रतीन्धक, कुतिरथ, देवमीढ़, विबुध, महाधृति, कीर्तिरात, महारोमा, स्वर्णरोमा, ह्रस्वरोमा से सीरध्वज का जन्म हुआ।
राजा सीरध्वज को सीता नाम की एक पुत्री हुई। सूर्यवंश इससे आगे बढ़ा। जिसमें कृति नामक राजा का पुत्र जनक हुआ। जिसने योग मार्ग का रास्ता अपनाया। कुश वंश से ही कुशवाह, मौर्य, सैनी, शाक्य संप्रदाय की स्थापना हुई। एक शोधानुसार कुश की 50वीं पीढ़ी में शल्य हुए। जो महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे। कुश महाभारत काल के 2500 वर्ष पूर्व से 3000 वर्ष पूर्व हुए थे। यानिकि आज से 6,500 से 7,000 वर्ष पूर्व। शल्य के बाद बहत्क्षय, ऊरुक्षय, बत्सद्रोह, प्रतिव्योम, दिवाकर, सहदेव, ध्रुवाश्च, भानुरथ, प्रतीताश्व, सुप्रतीप, मरुदेव, सुनक्षत्र, किन्नराश्रव, अन्तरिक्ष, सुषेण, सुमित्र, बृहद्रज, धर्म, कृतज्जय, व्रात, रणज्जय, संजय, शाक्य, शुद्धोधन, सिद्धार्थ, राहुल, प्रसेनजित, क्षुद्रक, कुलक, सुरथ, सुमित्र हुए। यह सभी वंश खुद को शाक्यवंशी कहते हैं।
वर्तमान समय में सिसोदिया, कुशवाह (कछवाह), मौर्य, शाक्य, बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) जो राजपूत वंश हैं। यह सभी भगवान प्रभु श्रीराम के वंशज है। जयपूर राजघराने की महारानी पद्मिनी और उनके परिवार के लोग की राम के पुत्र कुश के वंशज है।

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भवानी सिंह थे कुश के 309वें वंशज
महारानी पद्मिनी ने एक अंग्रेजी चैनल को दिए में कहा था कि उनके पति भवानी सिंह कुश के 309वें वंशज थे। इस घराने के इतिहास की बात करें तो 21 अगस्त 1921 को जन्में महाराज मानसिंह ने तीन शादियां की थी। मानसिंह की पहली पत्नी मरुधर कंवर, दूसरी पत्नी का नाम किशोर कंवर था। मानन सिंह ने तीसरी शादी गायत्री देवी से की थी। महाराजा मानसिंह और उनकी पहली पत्नी से जन्मे पुत्र का नाम भवानी सिंह था। भवानी सिंह का विवाह राजकुमारी पद्मिनी से हुआ। लेकिन दोनों का कोई बेटा नहीं है एक बेटी है जिसका नाम दीया है और जिसका विवाह नरेंद्र सिंह के साथ हुआ है। दीया के बड़े बेटे का नाम पद्मनाभ सिंह और छोटे बेटे का नाम लक्ष्यराज सिंह है।

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धर्म परिवर्तन से पहले मुसलमान भी हैं राम के वंशज?
राजस्थान में कुछ मुस्लिम समूह कुशवाह वंश से ताल्लुक रखते हैं। मुगल काल में इन सभी को धर्म परिवर्तन करना पड़ा। बावजूद इसके यह सभी आज भी खुद को प्रभु श्रीराम का वंशज ही मानते हैं। मेवात में दहंगल गोत्र के लोग भगवान राम के वंशज हैं। छिरकलोत गौत्र के मुस्लिम यदुवंशी माने जाते हैं। राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली जगहों पर ऐसे कई मुस्लिम गांव या समूह हैं, जो राम के वंश से संबंध रखते हैं। डीएनए शोधाधुसार उत्तर प्रदेश के 65 प्रतिशत मुस्लिम ब्राह्मण बाकि राजपूत, कायस्थ, खत्री, वैश्य और दलित वंश से ताल्लुक रखते हैं। लखनऊ के एसजीपीजीआई के वैज्ञानिकों ने फ्लोरिडा और स्‍पेन के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किए गए अनुवांशिकी शोध के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला था।

 

प्रदीप शाही

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