भाई दूज पर इस मंदिर में माथा टेकने से…सांप के काटे इंसान को मिलता है नया जीवन

धर्मेन्द्र संधू

भारतीय मंदिरों में होने वाले चमत्कारों मंदिरों से जुड़े रहस्यों के बारे में तो आपने सुना ही होगा। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी देंगे जिसमें घटित होने वाला चमत्कार श्रद्धालुओं को हैरान कर देता है।

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अकसर लोगों को कोई जहरीला कीड़ा या सांप काट ले तो उपचार करने के चलते उस व्यक्ति की मौत हो जाती है। लोग डाक्टर के पास जाते हैं या फिर किसी जहर उतारने वाले बाबा के पास। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि केवल एक मंदिर में बिना कोई धागा बांधे या दवाई के भी सांप के जहर का असर खत्म किया जा सकता है। इंसान तो क्या जानवर को भी कोई जहरीला कीड़ा या सांप काट ले तो वह भी इस मंदिर में आकर ठीक हो जाता है। एक ऐसा ही अदभुत चमत्कारिक मंदिर मध्य प्रदेश में स्थित है।

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रतनगढ़ माता मंदिर

मध्य प्रदेश के दतिया से 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है प्राचीन ‘रतनगढ़ माता मंदिरइस मंदिर का नजदीकी गांव रामपुरा है। इस गांव से मंदिर की दूरी महज पांच किलोमीटर है। “सिंधनदी के किनारे पर स्थित इस मंदिर के प्रति लोगों के मन में अथाह श्रद्धा है। वैसे तो सारा साल ही देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त रतनगढ़ माता कुंवर जी के दर्शन करने कृपा प्राप्त करने के लिए आते हैं। लेकिन भाई दूज के दिन इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि कुंवर जी, माता के भाई हैं।

केवल मिट्टी का बंध लगाने से बच जाती है जान

इस मंदिर में आने वाले आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों का मानना है कि रतनगढ़ माता और कुंवर जी के आशीर्वाद से जहरीले सांप के जहर का असर भी खत्म हो जाता है। लोगों का विश्वास है कि खेत या घर पर कोई जहरीला कीड़ा या सांप काट ले तो उसी समय रतनगढ़ माता और कुंवर जी का नाम लेकर जमीन से मिट्टी उठाकर बंध लगा लिया जाए तो इंसान या पशु की जान बच जाती है। इसके बाद दीपावली के बाद आने वाले भाई दूज के त्योहार पर माता कुंवर जी के दर्शन करना जरूरी माना जाता है। सांप के काटे इंसान पशु इस दिन मंदिर में जाकर माथा टेकते हैं और माता कुंवर जी के दर्शनों के बाद पीड़ित बिल्कुल ठीक हो जाता है। जो लोग अपने पशुओं को मंदिर तक नहीं लेजा सकते वह उनके गले की रस्सी लेकर मंदिर में पहुंचते हैं।

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मंदिर से जुड़ी कथा

माँ रतनगढ़वाली रतनगढ़ माता मंदिर के साथ एक कथा जुड़ी है। कथा के अनुसार शिवा जी मुगलों के बीच युद्ध चल रहा था। इस दौरान विध्यांचल के जंगलों में भूखे-प्यासे शिवा जी के साथ एक चमत्कार हुआ। जंगल में एक कन्या उनके लिए भोजन लेकर पहुंची। हैरान होते हुए शिवा जी ने अपने गुरू स्वामी रामदास से इस बारे में पूछा कि इस जंगल में इस प्रकार भोजन परोसने वाली कन्या कौन हो सकती है। इस पर स्वामी रामदास ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखकर बताया कि यह कन्या कोई और नहीं बल्कि साक्षात मां अंबे है। कहा जाता है की इसके बाद वीर मराठा शिवा जी की मुगलों पर जीत हुई थी। इसके बाद शिवा जी ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

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इस मंदिर में माथा टेकने के बाद जहरीले जानवर का शिकार हुआ इंसान या पशु बच जाता है। इसके बारे में लोगों का मानना है कि कुंवर महाराज जंगल में शिकार खेलने जाते थे तो जहरीले जानवर अपना जहर खुद ही बाहर निकाल देते थे। इसी कारण आज भी लोग सांप या किसी जहरीले जानवर के काटने के बाद कुंवर जी का नाम लेकर उस स्थान पर मिट्टी का बांध लगाते हैं तो जहर का असर खत्म हो जाता है।

मंदिर में लगा है देश का सबसे वजनी घंटा

रतनगढ़ माता के मंदिर में लगा घंटा विशेष दर्शनीय है। इसे देश का सबसे वजनी घंटा माना जाता है। इस आकर्षक घंटे का वजन लगभग 21 क्विंटल है। इस घंटे से जुड़ी एक बात यह है कि इसका निर्माण श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए छोटे-छोटे घंटों को मिलाकर किया गया है। घंटे की आवाज़ को मधुर बनाने के लिए अन्य धातुओं जैसे तांबा ज़िंक के अलावा टिन धातु का विशेष रूप से इस्तेमाल किया गया है।   

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