भगवान श्री कृष्ण और 56 भोग का आपस में संबंध

-56 व्यंजनों (भोग) की प्रचलित रोचक कथाएं

प्रदीप शाही

द्वापर युग में भगवान श्री विष्णु हरि के भगवान श्री कृष्ण के रुप में अवतरित हुए अवतार की लीलाएं पांच हजार साल से अधिक समय व्यतीत होने के बावजूद आज भी प्रचलित हैं। इस धरती पर अवतरित हुए सभी भगवानों और देवी-देवताओं में से भगवान श्री कृष्ण को 16 कला संपूर्ण अवतार के तौर पर पूजा जाता है। भगवान श्री कृष्ण के जन्म से लेकर इस धरती से विष्णु लोक में गमन तक वाले सभी पावन स्थल आज भी भक्तों के लिए पूजनीय हैं। वहीं भगवान श्री कृष्ण और 56 भोग (व्यंजन) का भी एक गूढ़ संबंध जुड़ा हुआ है। श्री कृष्ण को परोसे जाने वाले 56 भोग की एक खास महिमा है। 56 भोग से संबंधित कई रोचक कथाएं भी जुड़ी हैं। आईए, आज आपको 56 भोग के बारे विस्तार से जानकारी देते हैं।

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बाल गोपाल को दिन में आठ पहर भोजन करवाती थी माता यशोदा

पहली कथा : बाल गोपाल की बचपन की लीलाएं भी न्यारी ही थी। बाल गोपाल बचपन में अधिक भूख लगने के कारण जल्दी ही विचलित हो जाते थे। इसी कारण माता यशोदा अपने लाडले बाल गोपाल को एक दिन में आठ पहर भोजन करवाती थी। एक बार जब श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत का पूजन करने का अपना प्रस्ताव गांववासियों के समक्ष रखा। तो इंद्र देव इस बात से गुस्से हो गए। और गुस्से में आकर उन्होंने घनघोर बरसात शुरु कर दी। तब भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से गांववासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपने तर्जनी अगुंली पर धारण कर लिया। तब भगवान श्री कृष्ण ने अनवरत सात दिनों तक बिना अन्न जल ग्रहण नहीं किया था।

आठवें दिन जब बरसात बंद हुई तो भगवान श्री कृष्ण ने सभी गांववासियों को गोवर्धन पर्वत के नीचे से बाहर निकलने को कहा। एक दिन में आठ पहर खाना खाने वाले बाल गोपाल अनवरत सात दिनों तक भूखे रहे। इससे गांववासियों व मैय्या यशोदा को बहुत कष्ट हुआ। तब सभी गांववासियों सहित माता यशोदा ने सात दिन और आठ पहर के हिसाब से 56 तरह के व्यंजनों का भोग अपने लाडले बाल गोपाल को लगाया।

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56 सखियां और 56 भोग एक समान

दूसरी कथा : कहा जाता है कि गौलोक में भगवान श्रीकृष्ण, राधिका जी के साथ एक दिव्य कमल पर विराजते हैं। जिस कमल में श्री कृष्ण और राधिका जी विराजते हैं, उस कमल की तीन परतें होती हैं। कमल की पहली परत में आठ पंखुड़ियां, दूसरी परत में 16 और तीसरी में 32 पंखुड़ियां होती हैं। इस तरह कमल में कुल 56 परतें होती हैं। प्रत्येक पंखुड़ी पर एक-एक सखी और मध्य में भगवान स्वयं विराजमान रहते हैं। कहा जाता है कि जिस तरह से कमल की 56 पंखुड़ियां पर 56 सखियों विराजमान रहती हैं। उसी तरह 56 भोग से भगवान श्रीकृष्ण भी अपनी 56 सखियों संग तृप्त होते हैं। 

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गोपियों ने श्री कृष्ण को भेंट किए थे 56 भोग

तीसरी कथा : इस कथानुसार जब गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए तपस्या शुरु की। गोपियों ने एक माह तक यमुना में भोर में स्नान किया। इतना ही नहीं गोपियों ने अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए मां कात्यायिनी की पूजा-अर्चना की। तब भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों की मनोकामना पूर्ति की अपनी सहमति प्रदान की। भगवान श्री कृष्ण की सहमति मिलने के बाद गोपियों ने व्रत समाप्ति और मनोकामना पूर्ण होने के बाद व्रत का  उद्यापन किया। तब गोपियों ने 56 भोग का आयोजन किया। और गोपियों ने 56 भोग को भगवान श्रीकृष्ण को भेंट स्वरुप प्रदान किया।

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