क्या कोरोना वायरस का वैक्सीन टेस्ट इस अफ्रीकन देश में होगा ?

-यूएस, चीन, कनाडा वैक्सीन बनाने में जुटा

प्रदीप शाही

चीन से पैदा हुए कोरोना वायरस (KOVID-19) का चपेट में सारा विश्व आया हुआ है। विश्व के 208 देशों के लोग उक्त वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। मरने वालों की संख्या हर मिनट परिवर्तित हो रही है। विश्व भर के वैज्ञानिक इस वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हैं। यूएस, चीन औऱ कनाड़ा के वैज्ञानिक कोरोना वायरस के वैक्सीन को बनाने में दिन रात एक किए हुए हैं। परंतु सबसे अहम बात यह है कि कोरोना वायरस की बनने वाली बैक्सीन का टेस्ट डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आफ कोंगो में करने का फैसला किया जा रहा है। यदि यह वैक्सीन कांगो के नागरिकों पर सफल रहा। तब इस वैक्सीन को अफ्रीका, रुस, योरुप के अन्य देशों में उपयोग के लिए लाया जाएगा। आखिर क्यों इस वैक्सीन का टेस्ट विश्व के एक छोटे से गरीब देश कांगो के नागरिकों पर किया जा रहा है।

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क्या होती है वैक्सीन ?

बैक्सीन काम कैसे करती है। सबसे अहम बात यह है कि किसी भी वायरस की वैक्सीन एक स्वस्थ शऱीर पर ही काम करती है। यदि किसी इंसान को कोरोना वायरस हो चुका है। तो वैक्सीन उस इंसान के शरीर पर काम नहीं करेगी। यानिकि उस वैक्सीन की कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह वैक्सीन उन लोगों के काम आएगी। जो मौजूदा समय में घरों में बंद हौ। जब वह अपने काम पर जाएंगे। तो उन्हें डर रहेगा कि कहीं कोई आदमी उस पर छींक न दें। जिससे वह संक्रमित हो जाए। तब वह इस वैक्सीन को अपने उपयोग में ला कर अपने रोजाना के काम सही ढंग से कर सकेंगा। साथ ही उसे कोरोना वायरस के संक्रमण से डर भी नहीं लगेगा। आपको यह बता दें कि कोरोना वायरस उन लोगों को जल्द संक्रमित करता है। जिनकी पाचन शक्ति कमजोर होती है। वैक्सीन के इंजेक्ट होने के बाद इंसान की पाचन शक्ति पहले से अधिक बेहतर होगी। और उसका शरीर कोरोना वायरस से लड़ने में बेहतर ढंग से काम करेगा। निकट भविष्य में यह बैक्सीन आम इंसान के लिए बेहद कारगार सिद्ध होगी।

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क्या बैक्सीन बनाने वाले देशों ने कांगो देश का किया चयन?

कोरोना वायरस प्रतिरोधक बैक्सीन को बनाने का काम मौजूदा समय में यूएस, चीन औऱ कनाडा  के वैज्ञानिक कर रहे हैं। इन देशों ने अफ्रीका के एक छोटे से देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आफ कोंगो के नागरिकों पर इस वैक्सीन का टेस्ट करने का फैसला किया है। जानकारी के अनुसार कोंगो के रहने वाले कुछ चयनित लोगों में इस वैक्सीन को इंजेक्ट किया जाएगा। साथ ही इन लोगों में कोविड-19 वायरस को इंजेक्ट कर उसकी जांच भी की जाएगी। यदि इन चयनित लोगों में कोरोना वायरस का कोई भी असर नहीं दिखाई दिया तो ही इस वैक्सीन को सफल माना जाएगा। इसके बाद ही दुनिया भऱ में इस वैक्सीन का प्रयोग शुरु हो पाएगा।

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विश्व में कहां पर है कोंगो

अफ्रीकन कांटिनेट में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आफ कोंगो एक छोटा सा देश है। इस देश की राजधानी किंगसाशा है। जबकि यहां पर कोंगोंलीश फ्रेंक करंसी का चलन होता है। सबसे खास बात यह है कि इस देश के पूर्व राष्ट्रपति योहोंबी ओपोंगो का कोरोना वायरस संक्रमण से ही कुछ समय पहले निधन हुआ था। कोंगो के नेशनल बायोलॉजीकल इंस्टीटयूट के प्रमुख जीन जेक्वस मूयेंबे ने पुष्टि करते कहा कि यूएस, कनाडा औऱ चीन की ओर से बनाई जाने वाली वैक्सीन का टेस्ट का यहां के नागरिकों पर किया जाएगा। यह टेस्ट इस साल में जुलाई अगस्त से शुरु कर दिए जाएंगे। गोर हो इससे पहले भी वर्ष 2019 में अफ्रीका के घाना औऱ कीनिया में मलेरिया की वैक्सीन को बेहतर बनाने के लिए टेस्ट किया जा चुका है। यह प्रक्रिया निरंतर जारी है। यह भी माना जाता है कि इस देश के लोगों की पाचन शक्ति बेहद मजबूत है। परंतु विश्व की कई समाजिक संस्थाएं इस तरह के टेस्ट को अफ्रीका में करने का विरोध भी कर रही है। क्योंकि यह देश बेहद गरीब है। ऐसे मे इन गरीब देशों के नागरिकों को किसी भी नुकसान से बचाना बेहद जररी है।

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