घरेलू परेशानियों को दूर करना है तो…एक बार आजमाएं यह तरीका

धर्मेन्द्र संधू

जीवन जीने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों की विशेष जरूरत है-रोटी, कपड़ा और मकान। अपना घर हर व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता है और घर बनाने के लिए भारतीय संस्कृति में एक शास्त्र की रचना की गई है, जिसे वास्तु शास्त्र के नाम से जाना जाता है।

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क्या है वास्तु शास्त्र ?

वास्तु शास्त्र’ वास्तु और शास्त्र दो शब्दों के मेल से बनता है। जिसमें वास्तु का अर्थ है घर और शास्त्र का अर्थ है निर्माण की नियमबद्ध प्रणाली। घर बनाने की वैज्ञानिक पद्धति या संपूर्ण नियमों को ही वास्तु शास्त्र कहा जाता है।

क्या है आवश्यकता ?

भारतीय संस्कृति में वास्तु शास्त्र में बताए गए नियमों से बना घर प्रगति उन्नति के लिए बेहतर माना जाता है। प्राचीन काल में घर बनाने के लिए इस कला को विशेष महत्व दिया जाता था। यह शास्त्र पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है और पर्यावरण में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा को जीवन को बेहतर बनाने के लिए उपयोग में लाना इसका मूल उद्देश्य है।

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कैसे करें गृह निर्माण ?

वैसे तो वास्तु शास्त्र एक गहन विषय है जिसे समझने और प्रयोग करने के लिए वास्तु विशेषज्ञों की सलाह ली जा सकती है। इस शास्त्र में गृह निर्माण संबंधी कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए जाते हैं जो इस प्रकार हैं-

सबसे पहले प्लॉट या घर बनाने के लिए ली गई ज़मीन को 9 हिस्सों में बांट लें। इसके बाद इसे 8 दिशाओं में चिह्नित करें। इसमें चार दिशाएं पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण होती हैं और 4 उप दिशाएं होती हैं दक्षिण-पूर्व, दक्षिण –पश्चिम, उत्तर-पूर्व, और उत्तर-पश्चिम। वास्तु शास्त्र के अनुसार प्लॉट को जिन हिस्सों में बांटा जाता है, उसके सबसे केंद्र वाले स्थान को ब्रह्म स्थान कहा जाता है। इस शास्त्र के अनुसार मकान बनाते हुए इस स्थान को खाली रखना चाहिए।

कहां बनाएं रसोई घर ?

घर के दक्षिण-पूर्व कोने को अग्नि कोण कहा जाता है। यह माना गया है कि अगर इस कोने में अग्नि जलती रहे तो उत्तम होती है। इसीलिए इस कोने में रसोई घर बनाने का विधान है। अगर आप बना बनाया घर खरीद चुके हैं और इसमें इस कोने में रसोईघर नहीं है तो भी भ्रम ना करें। घर के इसी कोने में किसी प्रज्वलित दीप या हवन कुंड की तस्वीर को लगाने से भी श्रेष्ठ फल प्राप्त होता है। बस इतना ध्यान रखें कि घर की दक्षिण दिशा में पानी नहीं होना चाहिए। अगर कोई बाथरूम या कोई नल घर के दक्षिण में पड़ता है तो इसे बंद कर दें और अगर संभव हो सके तो दक्षिण दिशा को सूखा रखने का प्रयास करें।

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कहां हो टॉयलेट ?

घर का बाथरूम उत्तर-पश्चिम में बनाया जा सकता है। अगर ऐसा संभव ना हो तो भी उत्तर दिशा में बाथरूम बनाया जा सकता है। इस दिशा में ज्यादा भारी सामान नहीं रखना चाहिए। घर की दक्षिण दिशा भारी समान के लिए बेहतर होती है। इसलिए स्टोर रूम आदि दक्षिण दिशा में बनाना चाहिए।

कहां बनाएं पूजा घर ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के उत्तर-पूर्व कोने में पूजा घर बनाना चाहिए। अगर ना बन सके तो भी इस दिशा में घर के किसी वैवाहिक जोड़े का शयनकक्ष यानी बेडरूम ना बनाएं। आप इस दिशा में बच्चों का सोने का कमरा भी बना सकते हैं।

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बोरवेल या समर्सिबल के लिए उपयुक्त स्थान

घर की उत्तर-पूर्वी दिशा बोरवेल के लिए बेहतर मानी जाती है।

इसके अतिरिक्त सीढ़ियां और घर के मुख्य द्वार का निर्माण करते समय भी वास्तु के नियमों का ध्यान रखना चाहिए। अगर आपका घर इन नियमों द्वारा नहीं बना है और आपके जीवन में कोई परेशानी है तो भी भ्रम ना करें। घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह लगाएं और घर पर ज्योति जलाए, पाठ करें। विश्वास रखें कि ईश्वर में ही आपकी समस्त समस्याओं का समाधान करने की शक्ति है। व्यर्थ में पंडितों वास्तुकारों के झांसे में फंस कर अपना घर और धन बर्बाद ना करें।

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